Friday, 12 April 2013

वंदना


हे ईश
झुकाये अपने शीश
तुझको रहा पुकार
आज तेरा परिवार
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हिन्दू ने राम कहा
तो ईसाई ने मसीहा
मुसलमां का मुहम्मद
पर रब तो तू सब का
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मानवता की काया पर
साम्प्रदायिकता की छाया
अपने में लेगी लीन कर
हे प्रभु यह कैसी माया
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बुद्धिजीवियों की बुद्धि को
भक्तजनों की भक्ति को
दो अपने प्रेम की दीक्षा
हे राम मत लो यह परीक्षा
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हे सर्वव्यापक
जन जन में बसने वाले
बना दो अमृत की धारा
विष जो हम पीने है वाले