Sunday, 30 July 2017

अधूरी चाहतें अधूरे खवाब अधूरी ज़िंदगी

अधूरी चाहतें  अधूरे ख़्वाब अधूरी ज़िंदगी|
इंतज़ार है न जाने कब होगी पूरी ज़िंदगी||
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डोल रही देख मंझधार में यह कश्ती हमारी|
गिरा दिये तुमने हाथों से पतवार भी ज़िंदगी||
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थक गये नैन मेरे यहाँ राह तकते तुम्हारा|
.बेचैन आँखों को है इंतज़ार अब भी ज़िंदगी||
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राह ज़िंदगी की मुश्किल होंगी इस कदर हमारी|
सोचा न था यह हमने ख़्वाब में भी कभी ज़िंदगी||

उखड़ रही यहाँ साँसे भी लम्हा लम्हा हमारी|
खत्म सब कुछ हो जायेगा जब न रहेगी ज़िंदगी||

रेखा जोशी