Tuesday, 17 December 2013

अँधेरा शाम का बढ़ा जा रहा

ढल गई
शाम
अँधेरे के
मुख में
जा रहा
सूरज
छूट रहे
सब साथी
सूनी डगर
तोड़
रिश्ते नाते
छोड़
मोह माया
इक पंछी
अकेला
चला
जा रहा
अँधेरा
शाम का
बढ़ा
जा रहा

रेखा जोशी