Tuesday, 25 October 2016

अँधेरा / उजाला

अँधेरा 

काली रात थी सभी  ओर तम घनेरा 
दिनकर के आगमन से होता  सवेरा 
आओ मिल इक दीप प्रेम का रोशन करें 
प्रेम  से  फैले  उजाला  मिटे  अँधेरा 
.... 
उजाला 

अकेले  मत   बैठो   अँधेरे  में  तुम
खोल कर खिड़की देखो नज़ारे तुम
पट  खुलते  ही फैला  देk
जीवन  में  निहारो अब बहारे तुम

रेखा जोशी