Saturday, 30 November 2013

फूल मेरे आंगन के

खेल रहे है मिलजुल कर इस बगिया में 
नन्हे मुन्ने फूल मेरे आंगन के 
मस्त मस्त झूल रहें डाली डाली पे 
हर्षित हो रहा है मन देख कर उन्हें
भाग रहे उड़ती तितलियों को पकड़ने
फूलों के संग संग कभी मुस्कुराते
मेरे घर आंगन में खेलते बच्चे
चम्पा चमेली गुलाब सा महका रहे

रेखा जोशी