Tuesday, 5 November 2013

कर पहचान असत्य और सत्य की

देखा 
झांक कर 
मन के 
आईने में 
नही 
पहचान 
पाया 
खुद को 
धूल में 
लिपटे 
अनेक 
मुखौटे 
नहीं था 
वो मै 
मूर्ख मनवा 
पहचान ले 
खुद को 
साफ़ कर ले 
धूल को 
और 
फेंक दे 
सब मुखौटे 
कर पहचान 
असत्य 
और 
सत्य की 

रेखा जोशी