Wednesday, 5 March 2014

साँवली सलोनी

 महिला दिवस पर उन महिलाओं के नाम जो हम जैसी कई महिलाओं के अनगिनत घरेलू काम संभालती है


पाजेब
की
छम  छम
सुनते ही
ख़ुशी की
इक लहर
दौड़ने
लगती है
मन में
मिलता है
सकून
उसके
आने की
आहट से
कैसे
लिख पाती
मै कुछ
अगर
वह न आती
आज
मुस्कुराती हुई
उस
साँवली  सलोनी
के घर में
घुसते
खिल उठा
मेरा मन
क्यों न
धन्यवाद
करें उनका
जो
बुहारती हमारा
घर आंगन
हमारे हाथों
का काम
करती
वह
तभी
निकल  पाते
हम
बाहर घर से
वह
और कोई नही
है वह
मेरे
घर की
बाई

रेखा जोशी