Friday, 7 March 2014

ज़िंदगी रूकती नही

सफर नीर का
पर्वत से सागर तक
याँ फिर
सागर से पर्वत तक
चलता जा रहा
निरंतर
रुकता नही
बस केवल
भ्रम है
समाना
नीर का
सागर में
ज़िंदगी भी
रूकती नही
चलती सदा
मृत्यु
के बाद भी
है ज़िंदगी
बदलता
केवल स्वरूप
उसका

रेखा जोशी