Thursday, 6 April 2017

नमनकरें उस महात्मा को


अजब सा माहौल
था वोह
दुश्मनों का खौफ
था ओफ
दोस्त भी बन रहे
थे दुश्मन
चमक रहे थे ख़ंजर
तलवारे
था फैल रहा धुआं धुआं
जहर से भरा भरा
शांति दूत
बन आया धरा पर
अहिंसा का पुजारी
जहर से जैसे वो
अमृत निकाल देता है
हर जन को गले लगा कर
प्रीत का पाठ
पढ़ाता वोह
था देवदूत राष्ट्रपिता
वोह
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
सबको अपना बनाता
वोह
ईश्वर अल्लाहके नाम
पैगाम पहुंचाता
वोह
नमन करें उस महात्मा को
प्रेम पथ पर चलना
सिखाया जिसने

रेखा जोशी