Monday, 25 September 2017

संस्मरण

तीन घंटे तीन घटनाएं (संस्मरण)

वैसे तो मै ऐसी बातों को मानती नहीं हूं,लेकिन हाल ही में मेरे साथ कुछ अजीब सी घटनाएं हुई,22 सितम्बर 2017 को मै झेलम एक्सप्रेस से पठानकोट जा रही थी ,सुबह  होने को थी कि अचानक मेरी नींद खुली,समय देखने के लिए पर्स से मोबाईल निकालने को बंद आंखों से पर्स खोजने लगी तो पर्स नदारद ,जल्दी से उठ कर पूरा बिस्तर झाड़ दिया लेकिन पर्स वहां होता तो मिलता ,वह तो चोरी हो चुका था,मैने जोर जोर से शोर मचाना शुरू कर दियाऔर अपने कैबिन से बाहर की ओर भागी ,"मेरा पर्स चोरी हो गया,मेरा पर्स कोई उठा कर ले गया,"तभी देखा बाहर दो लड़के खड़े थे,मुझे देखते ही बोले ,"आंटी एक पर्स टायलट में तंगा हुआ है ,हम यही सोच रहे थे कि टी टी को सूचित कर देते है "।मैभाग कर टायलट में गई तो देखा कि मेरा पर्स खूंटी पर टंगा हुआ है ,जल्दी से उसे टटोला तो पाया कि कुछ रुपए जो बाहर की पाकेट में ऊपर के खर्च के रखे थे वाह गायब थे ,बाकी सारा सामान ज्यों का त्यों था ,वापिस अपनी सीट पर आईं तो वह दोनो लड़के गायब थे।मै खुश हो गई कि ज्यादा नुकसान नहीं हुआ ।

कैबिन बैठे सभी यात्री इस घटना पर चर्चा का ही रहे थे तभी खिड़की के परदे की राड मेरे सर पर गिरी लेकिन मुझे कोई चोट नहीं आई, बाते करते करते मेरे मुख से यह निकला ,"पता नहीं  आज का दिन कैसा निकला , बातें करते स्टेशन आ गया और मै गाड़ी से उतर गई ।

मुझे पठानकोट से नूरपुर अपने भाई के घर जाना था अपने वयोवृद्ध पापा को देखन मैने एक लड़के से पूछा की नूरपुर की बस कहां से मिलती है तो उसने कहा कि उसे भी उसी तरफ जाना है  ,यहां से रेलवे फाटक क्रास कर के बस मिल जाएगी ,मै उसके साथ चलने लगी ,लेकिन रेलवे फाटक वाला रास्ता बन्द था सो उसने कहा कि साइड से रेलवे लाइनस क्रास कर लेते है ,जैसे ही मै उस तरफ बढ़ी ,रास्ता पथरीला होने के कारण मेरा पांव किसी पत्थर पर  पड़ा मै अपना संतुलन खो  बैठी और गिर गई मेरे मुंह और घुटनों पर हलकी चोटें आईं लेकिन मेरा बायां पांव बुरी तरह से मुड़ गया था और पूरा सूज गया था जिसके कारण मै खड़ी भी नहीं हो पा रही थी ,उस लड़के ने मुझे उठाया और धीरे धीरे बस अड्डे ले गया, मुझे बस मेंबिठाया और नूरपुर मेरे भाई के पास छोड़ कर  आया । बस में बैठे  सब यात्री मुझे देख कर  अपनी अपनी राय दे रहे थे ,""बच गई  कोई भारी ग्रह आया था ,टल गया"। तीन घंटों में तीन घटनाएं ,क्या सचमुच यह किसी ग्रह की साज़िश थी या मात्र संयोग ?,इन घटनाओं ने मुझे भी आश्चर्यचकित कर दिया।

रेखा जोशी