Sunday, 15 June 2014

' लव यू पापा


उस दिन माँ बाप की ख़ुशी सातवें आसमान पर होती है ,जिस दिन उनके परिवार में एक नन्हें से बच्चे का आगमन होता है ,जैसे किसी ने उनकी गोद में दुनिया भर की खुशियाँ बिखेर  दी  हो |राजीव  और गीता का भी यही हाल था आज ,गीता की गोद में अपना ही नन्हा सा रूप देख राजीव चहक उठा ''देखो गीता इसके हाथ कितने छोटे है''यह कहते ही राजीव ने अपनी उंगली उस नन्हे से हाथ पर रख दी  ,अरे अरे यह क्या, देखो इसने तो मेरो ऊँगली ही पकड़ ली |ख़ुशी के मारे राजीव के पाँव धरती पर टिक ही नहीं  पा रहे  थे ,यही हाल गीता का था ,इतनी पीड़ा  सहने के बाद भी गीता की आँखों की चमक देखते ही बनती थी ,बस टकटकी लगाये उस नन्ही सी जान को मुस्कुराते हुए देखती ही जा  रही थी|  राजीव उसे गोद में उठाते हुए बोला , ''यह तो हमारा सचिन है ,बड़ा हो कर यह भी सचिन की तरह छक्के मारे गा ''|

अनेकों सपने राजीव की आँखों में तैरने लगे ,अपने इन्ही सपनो को पूरा करने की चाह लिए हुए कब उनके बेटे  सचिन ने अपनी जिदगी के पन्द्रहवें वर्ष में कदम रख लिया,इसका राजीव और गीता को अहसास ही नहीं हुआ ,उनकी आँखों का तारा सचिन उनकी नजर में अभी भी  एक छोटा सा बच्चा ही था ,लेकिन सचिन  तो  अब किशोरावस्था  में पदार्पण कर चुका था, घंटों अपने चेहरे को शीशे  में निहारना,कभी  बालों को  बढ़ा लेता ,तो कभी  दाढ़ी को ,अपने को किसी हीरो से कम नही समझता था वो ,सारी की सारी दुनिया अपनी जेब में लिए घूमता था |उसमे आये  शारीरिक परिवर्तन और उसके मानसिक विकास ने उसे जिन्दगी के कई अनदेखी राहों के रास्ते दिखाने शुरू कर दिए | राजीव और गीता दोनों पढ़े लिखे थे ,वह सचिन को आज की इस दुनिया में क्या सही ,और क्या गलत है ,जब भी बताने यां समझाने  की कोशिश करते तो सचिन यां तो बहस करता यां मजाक में टाल देता ,वैसे बहस करना उसकी आदत सी बनती जा रही थी |गीता भी रोज़ की इस चिक चिक से परेशान सी रहने लगी ,फिर सोचती ,''यह उम्र ही ऐसी है ,बच्चों की किशोरावस्था के इस नाज़ुक दौर  के चलते अभिभावकों के लिए यह उनके धैर्य एवं समझदारी की परीक्षा की घड़ी है  |किशोरों के शरीर  में हो रही हार्मोंज़ की  उथल पुथल जहां उन्हें व्यस्क के रूप में नवजीवन प्रदान करने जा रही है ,वही उनका बचकाना व्यवहार ,उन्हें स्वयं की और माँ बाप की नजर में अजनबी सा बना देता है |माँ बाप से उनका अहम टकराने लगता है ,हर छोटी सी बात पर अपनी प्रतिक्रिया देना ,उनकी आदत में शामिल हो जाता है |किशोरों को  इस असमंजस की स्थिति से माँ बाप अपने विवेक और धेर्य से ही बाहर निकालने में मदद कर सकते है ,उनकी हर  छोटी बड़ी बात को महत्व दे कर ,उनका मित्रवत व्यवहार अपने लाडले बच्चों को जहां गुमराह होने से बचाते है वहीँ उनमे विशवास कर के उन्हें एक अच्छा  नागरिक बनने में भी सहायता भी करते है ''|राजीव और गीता किशोरावस्था की इन सब समस्याओं से अनजान नहीं थे लेकिन फिर क्यों नहीं उन्हें सचिन का विशवास ,और प्यार जिसकी वह उससे उम्मीद करते थे ,नहीं मिल पा रहा था ||

 अचानक राजीव के मोबाईल फोन की घंटी बजी ,,''पापा जल्दी रेलवे प्लेट्फार्म पर आ जाओ ,''|राजीव जल्दी से कार में बैठ सचिन  पास पहुंच गया ,यह क्या ,उसका सचिन रेलवे प्लेटफार्म पर  रेलवे पुलिस के इंस्पेक्टर  के साथ खड़ा था |सचिन क्या बात है ?राजीव ने हैरानी से पूछा |जवाब मिला पुलिस इंस्पेक्टर से ,''बदतमीजी की है इसने ,गाली दी है एक बुज़ुर्ग  रेलवे कर्मचारी को ,सचिन के  चेहरे का रंग उड़ा हुआ था  |राजीव ने प्यार से सचिन के काँधे पर हाथ रखा और सचिन से माफ़ी मांगने को कहा,उसे भी अपनी गलती का अहसास हो रहा था ,सचिन ने उस बुजुर्ग के पाँव छू क़र माफ़ी मांगी ,उस बुजुर्ग कर्मचारी ने उसे माफ़ करते हुए समझाया कि जिंदगी में जो  काम हम प्यार के करवा सकते है वह अकड़ से नहीं |सारा मामला सुलझा क़र राजीव सचिन को घर ले आया ,माँ का चेहरा देखते ही सचिन की आँखों में आंसू आ गये ,माँ ने उसका हाथ थाम लिया ,इतने में राजीव भी उनके पास आ गया और सचिन उससे लिपट गया ,भर्राई आवाज़ से उसने कहा ''पापा आई लव यू |