Wednesday, 13 March 2013

कब तक अग्नि परीक्षा दोगी सीता मैया ?


वो रो रही थी ,चिल्ला रही थी लेकिन उन वहशी दरिंदों के चुंगल से निकलना उसके लिए असंभव था ,वह छ पुरुष थे और वह अकेली लड़की ,वो बलशाली और वह निर्बल अबला नारी ,सिर्फ शारीरिक रूप से अबला लेकिन मन शक्तिशाली ,वह उनके बाल नोच रही थी ,उन भेड़ियों को अपने दांतों से काट रही थी परन्तु उन जंगलियों से अपने तन को बचाने में वह नाकायाब रही ,बुरी तरह से घायल उस लड़की को उसके जख्मी पुरुष मित्र सहित उन भेड़ियों  ने उन्हें  चलती बस से बाहर फेंक दिया था,दामिनी के साथ घटी इस अमानवीय घटना से पूरे देश में आक्रोश की लहर दौड़ उठी ,नारी की सुरक्षा को लेकर हर कोई चिंतित हो उठा ,बलात्कार हो याँ यौन शोषण इससे पीड़ित न जाने कितनी युवतियां आये दिन आत्महत्या कर लेती है और मालूम नही कितनी महिलायें अपने तन ,मन और आत्मा की पीड़ा को अपने अंदर समेटे सारी जिंदगी अपमानित सी  घुट घुट कर काट लेती है क्या सिर्फ इसलिए कि ईश्वर ने उसे पुरुष से कम शारीरिक बल प्रदान किया है |यह तो जंगल राज हो गया जिसकी लाठी उसकी भैंस ,जो अधिक बलशाली है  वह निर्बल को तंग कर सकता है यातनाएं दे सकता है ,धिक्कार है ऐसी मानसिकता लिए हुए पुरुषों पर ,धिक्कार है ऐसे समाज पर जहां मनुष्य नही जंगली जानवर रहतें है |जब भी कोई बच्चा चाहे लड़की हो याँ लड़का इस धरती पर जन्म लेता है तब उनकी  माँ को उन्हें जन्म देते समय एक सी पीड़ा होती है ,लेकिन ईश्वर ने जहां औरत को माँ बनने का अधिकार दिया है वहीं पुरुष को शारीरिक बल प्रदान किया ,हम सब इस बात  को स्वीकारते हैं कि महिला और पुरुष इस समाज के समान रूप से जरूरी अंग हैं परन्तु  हमे यह भी स्वीकारना पड़ेगा चाहे नर हो याँ नारी दोनों का अपना भी स्वतंत्र अस्तित्व है और उन्हें अपने अधिकारों, स्वतंत्रता और समानता या फिर अपनी सुरक्षा के लिए मांग करना किसी भी प्रकार से अनुचित नही है क्योंकि सच तो यही है ,महिला-पुरुष दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं कम या अधिक नहीं। अब समय आ गया है सदियों से चली आ रही मानसिकता को बदलने का,  नारी को शोषण से मुक्त कर उसे पूरा सम्मान और समानता का अधिकार  दिलाने का ,ऐसा कौन सा क्षेत्र है जहां नारी पुरुष से पीछे रही हो एक अच्छी गृहिणी का कर्तव्य निभाते हुए वह पुरुष के समान आज दुनिया के हर क्षेत्र में ऊँचाइयों को छू रही है ,क्या वह पुरुष के समान सम्मान की  हकदार नही है ?तब क्यूँ उसे समाज में दूसरा दर्जा दिया जाता है ?केवल इसलिए कि पुरुष अपने  शरीरिक बल के कारण बलशाली हो गया और नारी निर्बल | अगर नारी अपनी  सुरक्षा की मांग कर रही है तो सबसे पहले यह सोचना चाहिए ''सुरक्षा किससे मिलनी चाहिए ?''सुरक्षा हमारे समाज के उन  जंगली भेड़ियों से मिलनी चाहिए जो दिखते तो मनुष्य जैसे है लेकिन अंदर से विक्षिप्त मानसिकता लिए हुए जंगली जानवर है जो मौका मिलते ही नारी को नोच खाने के लिए टूट पड़ते है |जब भी कोई जगली जानवर पागल हो जाता है तो उसे गोली मार दी जाती है ताकि वह कभी भी किसी को कोई  नुक्सान न पहुंचा  सके,लेकिन हमारे देश में  तो यहाँ वहां ऐसे जानवर सरेआम घूमते हुए मिल जाएँ गे, न जाने  कब और किस नारी को दबोच लें , चाहे वह दो तीन साल की अबोध बालिका हो याँ फिर सत्तर साल की माँ समान नारी हो  | इतिहास साक्षी  है कि इस देश की धरती पर लक्ष्मीबाई जैसी कई वीरांगनाओं ने जन्म लिया है ,वक्त आने पर जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति भी दी है और जीजाबाई जैसी कई माताएं भी हुई है जिन्होंने कई जाबाजों को जन्म दे कर देश पर मर मिटने की शिक्षा भी दी है ,नारी  की सुरक्षा ही एक स्वस्थ समाज  और मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकती है ,जब भी कोई बच्चा जन्म लेता है तो वह माँ ही है जो उसका प्रथम गुरु बनती है ,अगर माँ ही असुरक्षित होगी तो हमारी आने वाली पीढियां भी सदा असुरक्षा के घेरे में रहें गी और राष्ट्र का तो भगवान् ही मालिक होगा | |बहुत ही दुःख होता है ऐसे पुरुषों की सोच पर जो यह समझते हैं कि महिलाएं शोषित, कमजोर और लाचार हैं तभी तो वह आन्दोलन कर अपनी सुरक्षा की मांग कर रही है | |शर्म आती है मुझे जब आज भी नारी को ही कठघड़े में खड़ा कर उसकी अग्निपरीक्षा ली जाती है और बलात्कारी सलाखों के पीछे कैद न हो कर खुलेआम सडकों पर घूमता है |अपने तन मन और आत्मा से घायल पीड़ित नारी को इन्साफ मिलना तो दूर उसके अपने सगे सम्बंधी,यहाँ तक कि उसके अपने  माँ बाप तक उसे अपनाने से इनकार कर देते है और वह जाए तो कहाँ जाए |समाज दुवारा पीड़ित ,अपमानित ,बेबस नारी अपनी आँखों में आंसू भर कर ईश्वर से प्रार्थना ही कर सकती  है ,''काश यह धरती फट जाए और मै उसमे समा जाऊं |''  अपनों दुवारा ठुकराए जाने पर वह और कर भी क्या सकती है ,मै समाज से आज पूछती हूँ कि नारी को कब तक ,आखिर कब तक सीता मैया की तरह अग्निपरीक्षा दे कर अपने आपको सदा प्रमाणित करते रहना होगा ? बस बहुत सह लिया ,और नही ,अब और नही ,नारियों को जागना होगा ,हमारी सरकार और समाज को महिलाओं के प्रति सम्मान ,पुरुष के साथ समानता और सुरक्षा का अधिकार तो देना ही होगा |