Monday, 11 March 2013

गरल गरल सुधा सुधा


छिड़ी थी जंग
सुर औ असुर में
 अमृत पाना
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मोहिनी रूप
सागर का मंथन
किया था छल
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मस्त असुर
देवों के अधर पे
रख दी सुधा
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 गरल आया
 नीलकंठ शंकर
  विश्व बचा
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गरल सुधा
मिलते जीवन में
 है यही पाया
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स्वाती अमृत
 मिल कर जो पियें
ये सुधा सुधा
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 धरो कंठ में
 ये गरल गरल
 सब के लिए