Wednesday, 6 March 2013

भगवददर्शन [continued] 10


भगवददर्शन [continued]          'यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत |
                                                अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥
                                                परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् |
                                                  धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे '॥



श्री कृष्ण भगवान् ने जिस विराट रूप का दर्शन अर्जुन को करवाया था वही दर्शन पा कर श्रद्धावान पाठक आनंद प्राप्त करें गे [लेखक प्रो महेन्द्र जोशी ]

श्री कृष्ण नमो नम:

भगवददर्शन 
[श्री मद भगवदगीता अध्याय 11 का पद्यानुवाद ]
आगे ....

श्री भगवान ने कहा :-

52देख तुम जो रहे वह ,रूप दुर्लभ देखना ,
देवता भी चाहते ,जिस को नित्य देखना ।

53न वेद से न यज्ञ से और ना तप दान से ,
दिख सकूँ हूँ कभी मै ,तुम देखते ज्यों मुझे ।

54अनन्यभक्तियुक्त  ही यूं देख मुझको सके
तत्व से जान सकते और मुझ में मिल सकें ।

55कर्म दे मुझे ,मत्परम ,संगरहित भक्त जो ,
निर्वैर जो सभी में ,पाए मुझे पार्थ वो ।

॥  ग्यारहवां  अध्याय  समाप्त  ॥