Thursday, 1 February 2018

ग़ज़ल

प्यार तुमसे है किया हमने निभाने के लिए
छोड़ हमको क्यों गए तुम दिल दुखाने के लिए
,
रात रोती रह गई है चाँद खोया आसमां
इक सितारा है चमकता ग़म भुलाने के लिए
,
चाहतें रूठी हमारी आस भी कोई नहीं
जिंदगी है बोझ अपना अब उठाने के लिए
,
जिंदगी से दर्द ही हमको मिले किससे कहें
और मत लो इम्तिहाँ अब आज़माने के लिए
,
खूबसूरत ये नज़ारे अब बुलाते हैं हमें
गर न आओ तुम यहां  है  दिल जलाने के लिए
,
देखते हैं रात भर हम ख्वाब तेरे जिंदगी
गीत लब पर आ गए हैं गुनगुनाने के लिए
,
आरज़ूएँ हज़ार रखते हैं जिंदगी से हम
आज फिर उड़ने  लगे है मुस्कुराने के लिए

रेखा जोशी