Wednesday, 24 September 2014

कर रहे अभिनंदन नील नभ पर पंछी

ओस  की  बूँदों  से  है  नहाया  उपवन
स्वर्णिम उषाकिरणो ने सजाया गगन
कर रहे अभिनंदन नील नभ पर पंछी
भोर  की शीतल  पवन  ने हर्षाया मन

रेखा जोशी