Friday, 19 September 2014

न जाने फिर यह कैसी तड़प है आज दिल में

बेचैन   है  यह   मन   जाने  क्यों  मेरा  ऐसे
यूँ  तो  किसी से  कोई गिला  न शिकवा वैसे 
न जाने फिर यह कैसी तड़प है आज दिल में
लगता  हर पल कहीं  कुछ छूट सा  रहा जैसे 

रेखा जोशी