Saturday, 6 September 2014

ज़िंदगी तो अब एक मात हो गई है



ना जाने आज क्या बात हो गई है
शाम से  पहले ही  रात  हो  गई है

कब से हमें इंतज़ार था  तुम्हारा
ख़्वाबों में अब मुलाकात हो  गई है

कहने को तो तुम्हे  बहुत कुछ था पर
दिल से  दिल की यहाँ बात हो  गई है

नयन बिछायें हमने राह में तेरी
थक गई  आँखें  अब रात हो गई है

चाहत तेरी ऐसे समाई दिल में
ज़िंदगी तो अब एक मात हो गई है

रेखा जोशी