Saturday, 30 January 2016

आसमान चाँद निकला अब उजाला चाहिए

गीतिका 

प्यार में दिल को सदा दिल से मिलानाचाहिए 
कुछ नहीं तुम को पिया हमसे छिपाना चाहिए 
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खिलखिलाती धूप में गुल मुस्कुराते बाग़ में 
 भंवरे को भी यहाँ  पर  गुनगुनाना चाहिए  
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रात की रानी खिली अंगना हमारा खिल उठा 
आसमान चाँद निकला अब उजाला चाहिए 
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ओस की बूँदें  पुकारे आँख आँसू  भर यहाँ 
 रात रोती ही रही अब दिन सुहाना चाहिए 
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काश तुम आओ यहाँ पर तो बहारे फिरखिलें 
दिल किसी का तोड़ कर फिर यूँ न जाना चाहिए 

रेखा जोशी