Saturday, 2 July 2016

मनु भाई मोटर चली पम पम पम |

पूर्व प्रकाशित रचना 

मोटर कार में सवार होकर मनु भाई अपने घर से निकले ,बीच रास्ते में ही उनकी मोटर गाड़ी ने दे दिया जवाब ,चलते चलते ढुक ढुक कर के गाड़ी गई रुक ,परेशान हो कर मनु भाई मोटर कार से नीचे उतरे ,गाड़ी के आगे पीछे घूमे,चारो और चक्कर लगाया लेकिन समझ में कुछ नहीं आया |हाईटेक जमाना है ,मोबाईल मिला कर झट से मैकेनिक को बीच सड़क पर बुलवा लिया ,मैकेनिक ने बोनट खोल कर अच्छे से गाड़ी की जांच की और हाथ खड़े कर दिए ,”साहिब जी यह तो न चलने की ,इसके तो ब्रेक ही जाम हो गए,इसकी तो ओइलिंग करवानी पड़ेगी |

परेशान मनु भाई क्या करते ,उन्हें तो आज हर हालत लोन पास करवाना था | गाड़ी की चाबी मैकेनिक को सोंप ,बगल में फ़ाइल दबा कर ,ऑटो रिक्शा में सवार हो चल दिए लोन पास करवाने दफ्तर की ओर,लेकिन यह क्या ,दरवाज़े पर ही बेचारे को रोक लिया एक चपड़ासी ने ,”किससे मिलना है ?,क्यों मिलना है ?” अनेकों सवालों की बौछार लगा दी ”| मनु भाई ने उसे उपर से ले कर नीचे तक देखा,और जवाब दिया ”अरे भाई ,लोन पास करवाना है ,तुम मुझे अंदर क्यों नहीं जाने दे रहे ,मुझे आज यहाँ बुलाया है ”एक ही सांस में मनु भाई बोलते चले गए |चपड़ासी आराम से दरवाज़े के आगे रास्ता रोके अपनी हथेली पर तम्बाकू रगड़ता रहा ,हाथ की एक ऊँगली से सामने पड़े धूल माटी से सने बेंच की ओर इशारा करते हुए बैठने को कहा ,मुंह में तम्बाकू फांकते हुए बोला ,”अभी साब नहीं है ,इंतज़ार करो |

 हताश हो कर बेंच को रुमाल से साफ़ किया और उस पर बैठ गए मनु भाई |तभी एक महिला धड़धडाते हुए आई और दरवाज़ा खोल कर अंदर चली गयी ,उसके अंदर घुसते ही मनु भाई भी उसके पीछे जाने को हुए ,तभी चपड़ासी ने दरवाज़े पर अपनी बाजू लम्बी कर उसका रास्ता रोक दिया ,अरे अरे कहां घुसे जा रहे हो ,वो जो अंदर गयी है न ,पार्षद है , चलिए चलिए जनाब अभी और इंतज़ार कीजिये |मुंह मसोस कर बेचारे फिर उसी बेंच पर आ कर बैठे ही थे कि तभी एक आदमी आया और उसने अपनी जेब से सौ  रूपये का नोट निकला और उस चपड़ासी की हथेली पर अपना हाथ रखते हुए अंदर चला गया |उसे ऐसा करते देख मनु भाई भी बेंच से उठे और अपनी जेब से सौ  का नोट निकाल कर चपड़ासी को थमाया और भीतर दाखिल हो गये ,सीधे उस बाबू की मेज़ पर पहुचे और पूछा कि उसका लोन तो पास हो गया न ,पिछले महीने फाइल जमा करवाई थी |बाबू ने अपनी नाक पर रखा चश्मा उपर किया ,”एयं कौन की फाइल ” मनु भाई की आवाज़ थोड़ी तेज़ हो गई ,”अरे पिछले महीने लोन के लिए फार्म जमा करवाया था ,आपने आज बुलाया था ,क्या हुआ अभी तक लोन पास क्यों नहीं हुआ ”बाबू ने अपने सामने खुले हुए रजिस्टर को बंद किया ,अपनी कुर्सी से उठे अपना चश्मा ठीक करते हुए मनु भाई के कंधे पर हाथ रखा और उन्हें एक कोने में ले गये ,धीरे से उनके कान में फुसफुसाते हुए बोले ,”लोन के लिए अर्जी दी है न ,ऐसे कैसे पास हो जाये गा ,पहले कुछ चढावा तो चढाओ ,फिर देखें गे” |

मनु भाई का माथा ठनका,गुस्से में दांत भिच गये ,”हिम्मत तो देखो सरेआम रिश्वत मांग रहा है ,बाबू भाई थोडा और आगे बढ़े ,”देखो भैया थोड़ी ओइलिंग ही तो करनी है फिर देखना कैसे भागे गी तुम्हारी यह लोन की फाइल, नहीं तो खटारा मोटर कार की तरह यह भी रुक जाए गी| ” यहाँ बार बार चक्कर कटवाएं गे ”यह सोचते हुए उसने अपनी जेब से सौ का नोट निकला और थमा दिया उस बाबू के हाथ |बाबू ने नोट जेब में डाला और अपनी सीट पर जा कर बैठ गया ,पीछे पीछे मनु भाई भी हो लिए ,सीट पर बैठते ही बाबू ने चश्मे के अंदर से झांक कर कहा,”एक महीने के बाद आना भाई ”|मनु भाई हैरान परेशान ,अब ऐसा क्या हुआ ” अरे भाई जाओ यहाँ से खाली पीली दिमाग मत खाओ मेरा |यहाँ बीसियों जगह फाइल जाती है उपर से नीचे तक सब मिल बाँट कर खाते है ,सौ रूपये से क्या होगा ?जाओ यहाँ से जाओ बहुत हो चुका|” मनु भाई का तो दिमाग जैसे सुन्न पड़ गया ,पास पड़ी कुर्सी पर धम से बैठ गये ”,अब क्या होगा अगले महीने तो बेटी की शादी है ,पैसा हाथ नही आया तो कैसे होगी बेटी की शादी ,बेटे की पढाई का खर्चा कैसे उठा पाऊंगा , पत्नी के सारे अरमान धरे के धरे रह जाएँ गे ”|

यह सब मन ही मन सोचता हुआ वो उस सरकारी दफ्तर से बाहर निकल आया और टकरा गया इक पागल से ,जिसके हाथ में थी तेल की इक शीशी ,टकराते ही वो जोर से चिल्लाया ,”बहुत कीमती है यह ,टूट जाती तो ,इसमें वो चीज़ है जो हमारे हिन्दुस्तान को चला रही है ,एक एक बूंद कीमती है इसकी ,इससे हर मुश्किल काम मिन्टों में हो जाता है ,हर सरकारी विभाग इसके बलबूते पर ही चल रहा है |एक राज़ की बात बताता हूँ .इससे कोई भी रातोरात लखपति ,करोडपति बन सकता है ,लाकर नोटों से भर जाते है इसका जादू तो हर छोटे बड़े के सर चढ़ कर बोल रहा है एक चपड़ासी से ले कर ऊँचे ओहदे वाले अफसर हर कोई इसका ही गुणगान कर रहें है ,अगर इसकी मेहरबानी न हो तो आज हमारे देश का हर काम रुक जाए गा और देश जाएगा धरातल में ,जी हाँ धरातल में ही जा रहा है देश ,रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का पेट बढ़ता ही जा रहा है |और यह दिन प्रतिदिन फलफूल रहा है ,खोखली कर रहा है यह नीव हमारे आदर्शों की,मूल्यों की और हमारी संस्कृति की”|

उस पागल की बाते सुन मनु भाई हतप्रद रह गये ,”कितनी कडवी सच्चाई है यह आज ईमानदारी ,मेहनत जैसे शब्द खोखले हो चुके है ,बेमायने हो गए है ,ईमानदार और मेहनती इंसान को लोग बेवकूफ कहते है ,बेवकूफ ”| मनु भाई ने मेकेनिक को फोन कर अपनी खटारा मोटर कार मंगवाई ,उसकी ओइलिंग हो चुकी थी ,मनु भाई गाडी में बैठे और उनकी मोटर चली पम पम पम | 

रेखा जोशी