Monday, 17 February 2014

मेरे सपनों की रानी कब आये गी तू


मोतीचूर का लड्डू क्यों जनाब ?आ गया न मुहं में पानी ,लड्डू और वह भी मोतीचूर का ,सुनते ही जी ललचा जाता है और अगर वह सामने  सजी हुयी प्लेट में पड़ा हो तो क्या कहने ,हर किसी का दिल करे गा बस जल्दी से उठाओ और मुहं में डाल लो ,अरे भई  मुहं में डालने से पहले अच्छी तरह सोच समझ लो , कहीं ऐसा न हो मुहं का स्वाद ही बिगड़ जाए ,अरे नही नही , एक बार मुहं में डाल कर इसे बाहर थूक मत देना ,ऐसा करने से आप बहुत बड़ी मुसीबत में पड़ सकते हो ,यही तो हुआ बेचारे गोलू जी के साथ ,बहुत ही खूबसूरत अपनी सहयोगी सुन्दरी के प्रेमजाल में फंस कर झट मंगनी कर पट शादी के बंधन में बंध गए , वह शादी क्या , उनकी बर्बादी थी , यूँ समझ लो ,चार दिन की चांदनी फिर अँधेरी रात ,बस कुछ ही दिनों में प्यार का खुमार रफूचक्कर हो गया और गोलू जी जो कभी आसमान में उड़ा करते थे ,वह मोतीचूर का लड्डू खाते ही चारो खाने चित हो कर जमीन पर औंधे मुहं गिर गए | सुन्दरी अल्ट्रा मार्डन और बेचारे गोलू जी  एक बहुत ही साधारण परिवार से सम्बन्ध रखते थे |इस प्रकार की शादियाँ  भला कितने दिन चल सकती है ,अंत में तुम उस गली और मै इस गली, फिर शुरू हो जाती है लम्बी कानूनी लड़ाई जो खत्म होती है तलाक पर जाकर ,जवानी का वह अनमोल समय यूहीं  व्यर्थ में बर्बाद नहीं करना चाहते तो भैया इस मोतीचूर के लड्डू को खाने के लिए इतने भी बेताबी ठीक नही |

उधर बेचारे गोलू जी तो कोर्ट कचहरी के चक्कर काट रहें है ,और इधर हमारे रामू भैया के मुहं में मोतीचूर के स्वादिष्ट लड्डू को देख कर पानी आ रहा है ,बहुत ही बेचैन हो रहें है उसे खाने के लिए , आजकल वह सोते जागते बस उस लड्डू के ही सपनो में खोये रहते है ,तडप रहें है उसका स्वाद चखने के लिए ,रात दिन एक ही गाना उनके होंठो पर रहता है ,मेरे सपनों की रानी कब आये गी तू |'' देखिये जनाब ,जी भर के सपने देखिये ,वह इसलिए कि सपने हकीकत से ज्यादा खूबसूरत होते है ,ऐसे हसीन सपने देखने का नाम ही जवानी है |रामू भैया जी जरा सपनो से बाहर निकल कर तो देखिये ,इस मोतीचूर के लड्डू को सहेज कर प्यार से खाना  कितना मुश्किल काम है ,कितने नाज़ नखरे उठाने पड़ते है अपने घर की सुख शांति के लिए ,अपने दोस्त श्याम सुंदर और उसकी पत्नी  मीरा  की जोड़ी को ही देखो ,दोनों के माँ बाप ने उन दोनों को एक दूसरे के लिए पसंद किया , शादी के पहले दो साल तक तो श्याम सुंदर जी को अपनी पत्नी मीरा का खूबसूरत चेहरा चाँद जैसा दिखाई देता था ,लेकिन आज सात साल बाद श्याम जी अपने ही घर के अंदर डरते डरते कदम रखते है ,क्या मालूम कब उनके घर में ज्वालामुखी फूट पड़े |

सारी जिंदगी इस मोतीचूर के लड्डू की मिठास का स्वाद  कुछ किस्मत वालों के नसीब में ही होता है|अक्सर शादी के इस पवित्र बंधन में नोंक झोंक  तो चलती  ही रहती है ,लेकिन बेचारा  लड्डू  तो मुफ्त में ही बदनाम हो गया ,जो खाए वह भी पछताए जो न खाए वह भी पछताए |

रेखा जोशी