Friday, 7 February 2014

अंतहीन दौड़

वह
दौड़ रहां  है
इस
दुनिया में
अंतहीन दौड़
लेकिन
तन्हा
पूरे करने  है
उसे
सपने
जो देखे है
उसके पिता  ने
खरा उतरना है
उसे
उम्मीदों पर
अपनी माँ
पत्नी और
बच्चों की
पर
उसके
अपने सपने
दफन है
उसके
सीने में
थक कर
हांफने
लगा
लेकिन
वक्त नही है
रुकने का
जीतनी
है जंग
उसे
ज़िंदगी की
क्योंकि
उसे प्यार है
सबसे
अपने सपनो
से भी
ज्यादा

रेखा जोशी