Saturday, 2 April 2016

वह निभाता साथ हम अंजान है


गीतिका 

प्रेम करले ज़िंदगी वरदान  है 
प्रीत सबसे जो करें इंसान है 
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ज़िंदगी में सुख  मिले दुख भी मिले 
नाम प्रभु का जो जपे वह ज्ञान है 
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दीन दुखियों की यहाँ सेवा  करें 
जान वह   प्रभु की यहाँ संतान है 
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ज़िंदगी की डोर उसके हाथ में 
वह निभाता साथ हम  अंजान है 
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हाथ जोडे हम करें वंदन यहाँ 
मुश्किलें जो  समझता भगवान है 

रेखा जोशी