Monday, 22 May 2017

क्षणिकाएँ

दूर से आई
शहर में तेरे
साँसें हुई तंग
उठ रहा
धुआँ धुआँ
,
रह गई दंग
देख चकाचौंध
जगमगाते मॉल
है रंगबिरंगा जीवन
शहर में
,
तेरे शहर में
है भीड़ ही भीड़
हर तरफ
फिर भी
है सब तन्हा तन्हा
,
भावनायें शून्य
पत्थर की बैसाखियाँ
लिये
घूमते रहते
दर ब दर
लोग यहां
शहर में

रेखा जोशी