Monday, 8 May 2017

आधार छंद विमोहा

मापनी २१२,२१२,वार्णिक छंद

ज़िन्दगी आस है
अनबुझी प्यास है
,
मर मिटे हम पिया
डूबती  श्वास   है
,
फूल मुरझा गये
अब न मधुमास है
,
दीप भी बुझ गये
चाँद  निश्वास है
,
रुक जाओ सजन
रात यह खास है

रेखा जोशी

,