Saturday, 10 June 2017

ग़ज़ल

212. 212. 212. 212

टूट कर दिल हमारा पिया रह गया
ज़िन्दगी का सजन फलसफा रह गया
,
रात भर देखते हम रहे ख्वाब ही
कब हुई सुबह बस देखता रह  गया
,
उम्र गुज़ारी सजन दर्द दिल मे लिए
अब यहाँ दर्द का सिलसिला रह गया
,
यूँ सताओ न तुम ज़िन्दगी अब हमें
तीर दिल मे हमारे चुभा रह गया
,
काश मिलती हमें ज़िंदगी में  खुशी
ज़िन्दगी से यही  इक गिला रह गया

रेखा जोशी