Friday, 2 May 2014

टूट गई सपनों की दुनिया

बहुत छोटी
मेरे सपनों की दुनिया
टूट गई
बुनते ही
रख दिया
हाथ क्यों
तुमने
मेरी दुखती रग पर
सुना दिया
तुमने तो
फैसला अपना
क्यों नही सुनी
आह
इस दिल की
बेबस तड़प
हमारी
पुकारती रही
और
तुम दूर
बहुत दूर
चले गए हमसे
और
देखते रहे
हम
लाचार निगाहों से
जाते हुए
तुम्हे
दूर तक

रेखा जोशी