Tuesday, 20 May 2014

बुने ख़्वाब हमने थे कभी


बुने ख़्वाब हमने थे कभी 
टूट गए जो सपने थे कभी 
हम भी हारे नही  जहाँ से  
पाएँगे  जो अपने थे कभी 

रेखा जोशी