Friday, 27 February 2015

वेद वचन

1 ओम विश्वानि देव सवितुदुर्रितानि परासुव ।
यदभद्र्म तन्न्यासुव। । 

हे स्रष्टा संसार के ,दुःख दुर्गुण दूर करो ।
हे पालक सर्वजगत के ,जो भला वह दो । ।

2 यो भूतं च भव्यं च सर्वयश्चाधितिशृति .।
सर्वस्य च केवलं तस्मै ज्येष्ठाय ब्रहमो नमा :। ।

जो भूत है और भविष्य जो ,औ यह सब जो वर्तमान है ।
सर्वाधार सुख स्वरूप ,उस परम बह्म को प्रणाम है । ।

3 यस्य भूमि प्र्मान्तरिक्षमतो उदरम ।
दिवं यश्चक्षे मूद्रानं तस्मै ज्येष्ठाय ब्रहमो नमा :। ।

पृथ्वी जिसकी पदस्थली और अन्तरिक्ष उदर समान है ।
दिव्य लोक मस्तक है जिसका ,उस परम बह्म को प्रणाम है । ।

[ प्रो महेन्द्र जोशी ]