Thursday, 26 February 2015

नहीं था वो मै

झांक कर
देखा
मन के आईने में 
नही पहचान पाया
खुद को
धूल में लिपटे
अनेक मुखौटे
नहीं था वो मै
मूर्ख मनवा
पहचान ले खुद को
साफ़ कर ले धूल को
और
फेंक दे सब मुखौटे
कर पहचान
असत्य
और
सत्य की
रेखा जोशी