Wednesday, 11 November 2015

मेरी नन्ही सी प्यारी गुड़िया

मेरी नन्ही सी प्यारी  गुड़िया
भोली सूरत मासूम सा चेहरा
अपनी आँखों में चमक लिए
निहारती रहती है चेहरा मेरा
जिज्ञासा से भरे उसके नयन
 खोजते रहते है न जाने क्या
मोह लेती है वो निश्छल हसी
जब मुस्कुराती वो नन्ही परी
नन्ही नन्ही उँगलियों से जब
छूती है प्यार से चेहरे को मेरे
भर देती है वो तन मन में मेरे
इक नई उमंग इक नई तरंग
कभी खींच लेती आँचल मेरा
कभी सो जाती वो काँधे पे मेरे 
इस जिंदगी की शाम में उसने
आगमन किया नव भोर का

रेखा जोशी