Wednesday, 25 November 2015

वक्त तो अब यह बदलने से रहा

गीतिका

फूल गुलशन में महकने  से रहा 
दिल हमारा अब बहलने से रहा 
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रात  साजन नींद में अब सो  गई 
थाम दामन भोर चलने से रहा 
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चाह तेरी इस कदर रुला गई 
नीर   नैनों  का बहने  से रहा 
. 
पास आओ तुम कभी तो  हमसफ़र 
वक्त तो अब यह बदलने  से रहा 
. 
साथ तेरा तो निभाया ज़िंदगी 
साथ तेरे आज  चलने से रहा 

रेखा जोशी 

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