Sunday, 20 March 2016

है मदमस्त चल रही यहाँ फागुन की बयार

गुलाबों  का  मौसम आया बगिया में बहार 
है  कुहकती कोयलिया  अब अंबुआ की डार 
हर्षौल्लास  से  थिरकते झूम रहे आज सब 
है  मदमस्त चल रही यहाँ फागुन की बयार 

रेखा जोशी