Wednesday, 27 August 2014

मेरा अंगना [शीर्षक]


आज शानो अपने परिवार के साथ बहुत खुश थी ,महक रहा था उसका छोटा सा अंगना और उसे सुगन्धित किया था उसकी बेटियों ने , कुसुम और सुमन जो हर मुश्किल घड़ी में अपनी माँ के अंग संग खड़ी रहती थी lजिस दिन शानो ने अपने आलसी ,निकम्मे और शराबी पति को घर से बाहर का रास्ता दिखाया था ,कितनी टूट चुकी थी वह तब ,उस काली रात की यादें आज भी उतनी ही भयानक और दिल को दहला देने वाली थी, वह यह कैसे सहन कर सकती थी कि अपनी खून पसीने की कमाई जो उसने लोगों के घरों में झाडू पोंछा कर के इक्ट्ठी की थी उसका निक्कमा पति उसे पानी की तरह शराब पी कर बहा दे ,कितने सपने संजोये थे उसने जब उसकी शादी हुई थी ,एक तो गरीब परिवार में पली और बड़ी हुई थी वह ,उपर से सौतेली माँ में ताने और कडवी बाते जले पर नमक छिडकने का काम किया करती थी ,बाप ने भी उसकी छोटी उम्र में ही शादी कर अपना पीछा छुडवा लिया था l ऐसे में रामू को अपना पति पा कर वह बहुत खुश थी ,वह अपने सुहाने सपनो को हकीकत में बदलते हुए देखना चाहती थी लेकिन जल्दी ही रामू की असलियत खुल गई ,आलस का मारा रामू सारा सारा दिन चारपाई तोड़ने के सिवा कुछ नही करता था और शाम होते ही अपने जैसे आवारा दोस्तों के साथ पी कर अपना दिल बहला लिया करता था ,इसी बीच उसकी कोख में कुसुम आ गई थी lक्या करती बेचारी शानो ,हार कर घर की दहलीज लांघ कर गैरो के घर झाड़ू पोछे का काम करने लगी ,अपने लिए नही बल्कि अपनी उस नन्ही सी जान के लिए जो उसके पेट में पल रही थी l

शानो ने रामू को समझाने की बहुत कोशिश की ,वह अपनी जिम्मेदारियों की समझे और उन्हें निभाए लेकिन रामू को तो आराम से सब कुछ मिल जाता था ,रात को पीता और दिन को सोया रहता l धीरे धीरे रामू पीने के लिए शानो से पैसे लेने लगा ,कभी प्यार से तो कभी डांट डपट कर ,कभी कभी तो उस पर हाथ भी उठा देता था lसाल पर साल बीतते गए और कुसुम के बाद सुमन ,अजय ,विजय और महक उसके अंगना में खेलने लगी ,हर वर्ष एक के बाद एक बच्चा आता गया ,कई बार तो उसे अपने पेट सफाई भी करवानी पड़ी ,वह तन और मन से बहुत कमज़ोर हो गई थी ,लेकिन रामू को इससे कोई मतलब नही था वह तो बस अपने में ही मस्त था ,शानो के कमाए हुए पैसे पर वह अपना अधिकार समझता था , शानो के मना करने पर लात घूसों से पिटाई कर उसे अधमरा कर देता था ,छीन कर ले जाता था उससे वो पैसे जिससे वह अपने बच्चों का पेट भरती थी ,शानो का खून खौल उठता जब रामू उसकी मेहनत की कमाई छीन कर शराब में बहा देता था ,बच्चे भी बड़े हो गए थे पर बेचारे चुपचाप डर के मारे एक कोने में दुबक जाते थे l

उस भयानक रात में भी यही सब कुछ हुआ था ,रामू ने अपनी पूरी ताकत से उसकी पिटाई की थी ,मार मार कर उसे अधमरा कर दिया था पर पता नही शानो में इतनी शक्ति कहाँ से आ गई थी ,इतनी मार खाने के बाद भी उसने रामू को पैसे नही दिए और चीखती हुई घर छोड़ कर भाग खड़ी हुई ,भागते भागते वह सीधे अपनी मैडम जी के घर पहुंच गई थी lउसे इस हालत में देख उसकी मैडम जी जो एक टीचर थी हैरान हो गई ,शानो ने उनके पाँव पकड़ कर आप बीती सुना कर उनसे मदद मांगी थी lउसकी मैडमजी ने तुरंत पुलिस को फोंन लगा कर डोमेस्टिक वोईलेन्स के अंतर्गत मामला दर्ज़ करवा कर रामू को सजा दिलवाई थी और सदा के लिए उसे घर से बाहर करवा दिया था lतब से आज तक शानो ने रामू का मुहं तक नही देखा था l यह सब सोचते हुए शानो की आँखे भर आई ,अगर उस रात शानो कमज़ोर पड़ गई होती और घर से न भागी होती तो आज भी सब कुछ वैसे ही चल रहा होता,वैसे ही रोज़ रोज़ रामू की मार , वही गरीबी, उसे रामू के चले जाने का कोई दुःख नही था पर न जाने उसका ख्याल आते ही आज भी उसका मन भारी हो जाता था ,लेकिन वह खुश थी ,उसकी मैडम जी ने कुसुम को सिलाई कढाई का प्रशिक्षण दिलवाया और सुमन को कम्प्यूटर की ट्रेनिंग दिलवाई ,आज शानो का अंगना किसी स्वर्ग से कम नही था ,उसकी बिटिया महक और दोनों बेटे अजय ,विजय स्कूल में शिक्षा ले रहे है l आज उसके बच्चों ने उज्ज्वल भविष्य की ओर अपने कदम बढ़ा लिए थे