Monday, 4 August 2014

खूबसूरत नज़ारे संग संग बादलों के

छिपा कर अपनी पलकों में
खूबसूरत नज़ारे
संग संग बादलों के 
शीतल पवन के झोंकों से सिहरता
मेरा तन 
लौट कर आई मै
माथेरन पर्वत स्थल
से नीचे 
छोटी टोय रेलगाड़ी की
 छुक छुक ताल पर
चीरती हुई ऊँची नीची पहाड़ियाँ
घने जंगलों से नीचे
उतरती नेरल के
स्टेशन तक  
समा गया
यह खूबसूरत सफ़र
मेरी यादों में
सदा सदा के लिए 

रेखा जोशी