Saturday, 2 August 2014

पूरी कर ले ख्वाहिशें अपनी

मरता है हर पल
दे कर जन्म इक नए पल को
बदकिस्मत है हम जो
नही जानते मोल
इस सुनहरे पल का
गवां  देते है इसे व्यर्थ ही
छोटी सी ज़िंदगानी
यूँ ही गुज़र जायेगी
रफ्ता रफ्ता
सीने में लिये
लाखों अरमान
नही हाथ आएगा
फिर यह पल
पूरी कर ले
ख्वाहिशें अपनी
गुज़रने से पहले
इसके

रेखा जोशी