Wednesday, 19 August 2015

शर्मीला चाँद

सुन्दर सलोना
नभ पर
बादलों के झरोखों से
झाँक रहा
वह शर्मीला चाँद
.
शीतल चांदनी
मदमस्त पवन
संग संग मेरे
चल रहा
वह शर्मीला चाँद
.
लो वह उतर आया
धरा पर
बन प्रियतम देख
हर्षाया मन
खेल रहा मेरे संग
आँख मिचोली
वह शर्मीला चाँद
.
पिया मिलन
है चांदनी रात
हाथों में लिये हाथ
ओढ़े आँचल हया का
खिड़की से मुस्कुराया
वह शर्मीला चाँद
.
रेखा जोशी