Friday, 7 August 2015

आये न मोरे सजना रूठे है चितचोर

सावन आया झूमता घिरी घटा घनघोर
है चहुँ ओर  हरियाली  बन में नाचे मोर
पेड़ों  पे  झूले  पड़े   पवन  दे   हिचकोले
आये  न  मोरे  सजना  रूठे  है चितचोर

रेखा जोशी