Sunday, 9 August 2015

नैन निहारे राह , न आये घर साँवरिया

कुण्डलिया छंद
काली काली बदरिया , मचा रही है शोर
हरियाली चहुँ ओर है ,बन में नाचे मोर
बन में नाचे मोर, है लागे कहीं न जिया
नैन निहारे राह , न आये घर साँवरिया
हिचकोले दे पवन है झूला झूले आली
अँसुवन भीगे नयन,, है छाई घटा काली
रेखा जोशी