Friday, 27 March 2015

आ बैल मुझे मार

पत्नी से झगड़ कर
चौबे जी
घर से आये बाहर
चले हो कर  बाईक पे सवार
भिड़ते भिड़ते बचे
चौबे जी
जब आई सामने कार
गुस्से में रोकी बाईक
आव देखा न ताव
और खोला कार का द्वार
 कॉलर पकड़  सवार का
गुस्से में हुए लाल
हुई दोनों में खूब तकरार
तू तू मै  मै से हुई शुरू
करते रहे इक दूजे पर वार
तभी ले लिया पंगा
चौबे जी ने
दिये उन्होंने जड़
उस पर हाथ दो चार
तभी आ गये
कार सवार के और साथी चार
हुई धुनाई चौबे जी की
खाई जब उनकी मार
हाथ टूटा पाँव सूजा
चौबे जी
हो गए लाचार
कान पकड़ कर कर ली
तौबा ली कर
काहे लिया खुद ही  पंगा
गुस्से में  हो कर लाल
दिया न्योता मुसीबत को
खुद ही उसे  बुलाया
आ बैल  मुझे मार

रेखा जोशी