Tuesday, 27 September 2016

घूँघट में शरमाये नैना , नैनो में दीदार लिखें

सावन बरसा आँगन मेरे , चलती मस्त बयार लिखें
मिलजुल कर अब रहना सीखें प्यारी इक बौछार लिखें
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भीगा मेरा तन मन सारा ,भीगी मलमल की चुनरी
घूँघट में  शरमाये नैना ,  नैनो में दीदार लिखें

झूला झूलें मिल कर सखियाँ ,पेड़ों पर है हरियाली
तक धिन नाचें मोरा मनुवा ,है चहुँ ओर बहार लिखें
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गरजे बदरा धड़के जियरा ,घर आओ सजना मोरे
बीता जाये सावन साजन ,अँगना अपने प्यार लिखें
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नैना सूनें राह निहारें ,देखूँ पथ कब से तेरा
आजा रे साँवरिया मेरे ,मिल कर नव संसार लिखें

रेखा जोशी