Sunday, 25 September 2016

भूख


एक सुसज्जित भव्य पंडाल में शहर के मशहूर सेठ धनीराम के बेटे की शादी हो रही थी |लड़कियाँ और महिलायें सुन्दर सुन्दर वस्त्रों से सजी और आभूषणों से लदी हुई इधर उधर टहलते हुए एक दूसरे से हंसी मज़ाक कर रही थी | कुछ मनचले लड़के और लडकियाँ फ़िल्मी गानो की धुन पर झूम झूम कर थिरक रहे थे | अपने बेटे की शादी में सेठ जी ने खूब अच्छे से इंतज़ाम कर रखा था ताकि उनके मेहमानों को किसी भी तरह की कोई असुविधा न होने पाये | पंडाल का माहौल बहुत ही दिलकश और खुशनुमा था | नाच गानों की महफ़िल के साथ साथ पंडाल के भीतर अनेकानेक देशी और विदेशी स्वादिष्ट व्यंजनों की महक सब को लुभा रही थी | कहीं शराब का दौर चल रहा था तो कहीं लोग तरह तरह की ड्रिंक्स और गर्मागर्म सूप पी कर लुत्फ़ उठा रहे थे | हर कोई खुश और आनन्दित दिखाई दे रहा था | अपनी अपनी प्लेट में विभिन्न विभिन्न व्यंजन परोस कर शहर के जाने माने लोग उस लज़ीज़ भोजन का आनंद उठा रहे थे |खाना खाने के उपरान्त वहां अलग अलग स्थानों पर रखे बड़े बड़े टबों में वह लोग अपना बचा खुचा जूठा भोजन प्लेट सहित रख रहे थे ,जिसे वहां से सफाई कर्मचारी उठा कर पंडाल के बाहर रख देते थे |पंडाल के बाहर न जाने कहाँ से एक मैले कुचैले फटे हुए चीथड़ों में लिपटी औरत अपनी गोदी में भूख से रोते बिलखते नंग धडंग बच्चे को लेकर एक बड़े से टब के पास आ गई और उस टब में से लोगों की बची खुची जूठन से खाना निकाल कर जल्दी जल्दी खाने लगी और साथ ही साथ अपने भूख से रोते बिलखते हुए बच्चे के मुहं में भी डालने लगी |उसके पास खड़ा एक कुत्ता भी टब में मुहं डाल कर जूठी प्लेटे चाट रहा था |

रेखा जोशी