Thursday, 15 September 2016

हमे तो अब ख़ुशी से खिलखिलाना है

सजन मिल आशियाना अब बसाना है
हमें   तो  प्यार  तुमसे  ही  निभाना है 
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नहीं  चाहा कभी  तुम  दूर  हों  हमसे 
बहाना  कर सजन  क्यों  रूठ  जाना है  
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खिली है धूप आंगन में हमारे अब 
सुमन उपवन यहाँ पर अब खिलाना है 
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चलो साजन चलें उस पार हम दोनों 
सजन  दिल  आज दीवाना  हमारा है 
... 
मिली है ज़िन्दगी अब मुस्कुराओ तुम 
हमे तो अब ख़ुशी से खिलखिलाना है 

रेखा जोशी