Wednesday, 21 September 2016

अमृत सा उसका पानी

मदमस्त 
स्वच्छ निर्मल धारा 
उतरी धरा पर 
भागीरथी 
इठलाती नवयौवना सी 
हिमालय पर्वत से 
लहराती बलखाती 
रवानी जवानी सी 
उफनती जोशीली 
बहती जा रही 
अमृत सा उसका पानी 
जीवनदायनी 
हो गई मैली धारा 
है धर्म हमारा 
इसे रखना पावन 
बहती रहे सदा 
हमारी धरा पर 

रेखा जोशी