Saturday, 11 February 2017

पर्यावरण


रंगीन धरती का गीत  पर्यावरण
प्रकृति का मधुर संगीत पर्यावरण
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टूट रहे तार सूना पर्यावरण
बचाना हमें धरती का आवरण
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कोयल की कूक,पंछी की चहक,
फूलो की महक,झरनों की छलक
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प्रदूष्ण ने फैलाया कैसा  जाल
लिपटी  हुई धरती  उसमें आज
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कटे पेड़ों से बिगड़ा आकार
चहुँ ओर अब फैला हाहाकार
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आओ  लगायें नये पेड़ पौधे ,
सूनी धरा में खुशियाँ हम बो दे
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नये गीत गाये हसीं पर्यावरण
वनसम्पदा का प्रतीक पर्यावरण

रेखा जोशी