Saturday, 4 February 2017

चक दे इंडिया

एकांकी

""चक दे इंडिया",
कलाकार
सूत्रधार(पहला,दूसरा)
लक्ष्मी (पत्नी)
रमेश(पति)
दादी
गुड्डी
लाडू

दो व्यक्तियों का प्रवेश
पहला ,आज हम आपको सुनाते हैं
दूसरा ,एक नारी की कहानी
पहला,समाज की बेड़ियों को तोड़ कर आज की नारी
दूसरा ,पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर
पहला ,जीवन के संघर्ष की रणभूमि में उतर आई है
दूसरा,आज वह डॉक्टर है,वकील है,जज है,प्रिंसिपल है,टीचर है
पहला,और वह नेता भी है
दूसरा ,आज 21वीं सदी में भी हमें यह कहना पड़ रहा है
पहला,नारी तेरी  यही कहानी
दूसरा,आँचल में ममता आँखों में पानी

एक औरत का प्रवेश ,गोद में बच्ची,आँखों मेआँसू

पहला ,क्या हुआ बहन?तुम रो क्यों रही हो?
दूसरा,अरे अरे अरे ,तुम्हारी बच्ची तो बहुत सुंदर है,इसके पैदा होने पर आँसू मत बहाओ
औरत( लक्ष्मी) ,आप ही बताओ आँसू न बहाऊँ तो क्या करूँ,इसकी किस्मत भी तो मेरे जैसी ही होगी
पहला ,नारी की दुर्दशा की तो अनेक कहानियाँ है
दूसरा, कभी उसे कोख में ही तो कभी पैदा होते ही मार दिया जाता है
पहला ,कहीं  पर उसकी आबरू लूटी जाती है  और कहीं उसे ज़िंदा जला दिया जाता है
दूसरा ,इस तरह दिन महीने साल गुज़रते रहे और लक्ष्मी तिल तिल करके मरती रही
लक्ष्मी के पति रमेश का प्रवेश(शराब के नशे में चूर)
रमेश,,अरे लक्ष्मी कहाँ हो, बहरी  हो गई हो क्या,सुनाई नही देता ,जल्दी खाना लाओ बहुत जोरों की भूख लगी है
(झूमता हुआ गाता है,मै शराबी नही,मै शराबी नही....) लक्ष्मी का प्रवेश
(गोद में बेटा लाडू और बिटिया गुड्डी का हाथ थाम हुये
लक्ष्मी ,सारी तनखाह तो शराब में उड़ा देते हो ,कैसे जलेगा घर का चूल्हा
रमेश,खबरदार जो शराब के बारे में कुछ बोला
पहला ,यही तो है कहानी
दूसरा शराबी पति
पहला ,घर में गरीबी
दूसरा, खाने के लाले,सुनने को ताने
पहला,और औरत बेबस लाचार ,अपने टूटे हुए घर को सँवारती रही

गुड्डी को लाडू मारता है आवर उसकी किताबें फाड़ देता है
गुड्डी(रोती हुई),माँ माँ देखो लाडू ने मेरी किताबें फाड़ दी है
लाडू (नाचता हुआ) फाडूं गा, फाडूं गा ,ले यह ले ,(किताबें फाड़ताहै)
लक्ष्मी (गुस्से में)ठहर जा ,उसे थप्पड़ दिखारी है
(लाडू भाग कर दादी की गोद में छुप जाता है )
दादी,(पुचकारते हुए) क्या हुआ मेरे राजा बेटे क़ो किसने मारा
(लक्ष्मी को डांटते हुए) भगवान का शुक्र मना जोतुझे बेटे का सुख मिला है
खबरदार जो उसे कुछ कहा (लाडू के सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए)
गुड्डी से,तू टुकर टुकर क्या देख रही है,जा रसोई से भाई के लिए मलाई वाला ढूध ले कर आ,देख तो कितना कमजोर हो गया है
(लाडू गुड्डी को जीभ निकाल कर चिढाता है)
पहला,बीता बचपन ,आई जवानी
दूसरा ,है  घर घर में गुड्डी की कहानी
पहला,पर कुछ कर दिखाने की
दूसरा,थी गुड्डी ने ठानी
पहला,रंग लाई गुड्डी की मेहनत
दूसरा ,सभी बाधाएं झेलती हुई गुड्डी आगे बढ़ती गई और एक दिन वह डाक्टर बन गई
लाडू काप्रवेश
लाडू (ज़ोर से)माँ ,माँ (वह नीचे गिर जाता है और बेहोश हो जाता है,लक्ष्मी दौड़ कर उसे पकड़ती है)
लक्ष्मी (घबराते हुए) गुड्डी देख तो ज़रा इसे क्या हो गया
गुड्डी(जांचते हुए) माँ  यह तो नशे में है ,शराब का नही ययः तो ड्रग्स ले रहा है,शराब से भी ज्यादा खतरनाक
(लक्ष्मी के पति रमेश का प्रवेश)
रमेश,क्या हुआ मेरे लाडले को
गुड्डी,फुर्सत मिल गई बापू,कहाँ थे तुम जब यह आवारागर्दी करता था,कस के दो थप्पड़ लगाये होते तो आज  यह सब नही होता
(रोते हुए दादी का प्रवेश) अरे किसकी नज़र लग गई मेरे लाडू को
गुड्डी ,माँ बापू और दादी ,हमे इसका इलाज करवाना होगा,तभी इसे नशे की लत से छुटकारा मिलेगा
मैने फैसला किया है कि में इसी गाँव में अपना अस्पताल खोलूंगी,मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि में अपने गांववासियों की सेवा कर सकूं,
दादी,हाँ बेटी तू ठीक कह रही है ,तूने हमरी आँखें खोल दी है
रमेश ,मुझे अपनी बेटी पर गर्व है,में भारत की सभी बेटियों कोगुड्डी की तरह बनने की राय देता हूँ,तभी तो हम शान से कह सकेंगे
"चक दे इंडिया"
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