Thursday, 10 September 2015

छा गई जब घटा याद तुम को किया

आधार छंद पर गीतिका

मापनी - 212 212 212 212 

तुम न आये सजन शाम ढलने लगी 
अब मिलन की पिया आस बुझने लगी 
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है अँधेरा यहाँ छा रहा अब सजन 
चाँदनी भी यहाँ अब बिछुड़ने लगी 
.... 
जब दिया तोड़ दिल ज़िंदगी क्या करें 
नैन बहने लगे साँस थमने  लगी 
.... 
दीप जगमग  यहाँ आज बुझ ही गये 
रोशनी चाँद की भी सिमटने  लगी 
.... 
छा गई जब घटा याद तुम को किया 
बदरिया तिमिर की आज छटने लगी 

रेखा जोशी