Wednesday, 30 September 2015

हम डूब रहे सागर में आन बचाओ

जीना प्रभु  लाचार हुआ राह दिखाओ 
मेरे  प्रभु तुम अपना अब हाथ बढ़ाओ 
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आशीष हमे दो प्रभु हम शीश झुकाते 
हे नाथ हमारे मन में आस जगाओ 
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संसार दुखों का घर उपकार करो तुम 
अब दीन दुखी को प्रभु तुम आप उठाओ 
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माना तुम नैया सब की पार लगाते 
हम  डूब रहे सागर में आन बचाओ 
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हम हाथ यहाँ जोड़ तुम्हे आज पुकारें 
विनती सुन गिरते जन को राम सँभालो 

रेखा जोशी