Tuesday, 1 September 2015

कृष्ण प्रेम की जयकार से गूँजत संसार

यमुना के तट पर मनमोहन गोपाला 
गोकुल में कान्हा संग गेंद खेलत ग्वाला 
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खेलत गेंद मोहन नटखट नंदलाला
थी आगे चली गेंद पीछे भागत ग्वाला
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छवि नाग की देख गेंद फेंक यमुना में
फिर यमुना के पानी  में कूदत गोपाला 
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जा पहुँचे पाताल मनमोहन कन्हैया
था जहाँ पे भयंकर नाग सोवत कालिया 
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था हुआ घमासान तभी जल के भीतर
नाग कालिया ने ज़हरीली भरत फुंकार
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काला हुआ जल कान्हा श्याम कहलाये
मर्दन कर कालिया का गेंद आवत लाये
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बँसी की मधुर धुन पर फिर हुआ चमत्कार
कृष्ण प्रेम की जयकार से गूँजत संसार 

रेखा जोशी