Thursday, 18 February 2016

तन्हा सिर्फ तन्हा

है संघर्ष यह जीवन 
कब गुज़रा बचपन
याद नही
आया
होश जब से
तब  से
हूँ भाग रहा
संजों रहा खुशियाँ
सब के लिए
थे अपने कुछ
कुछ थे पराये
आज निस्तेज
बिस्तर पर पड़ा 
हूँ समझ रहा 
अपनों को
और
परायों को
था कल भी
और
हूँ आज भी
संघर्षरत
तन्हा सिर्फ तन्हा

रेखा जोशी